हमारी साझा धरोहर

लुहाच वंश का इतिहास

पुरखों की राह से आज की पीढ़ियों तक—एक साझा कहानी।

हिन्दी वीडियो · 49 सेकंड

हमारी जड़ों की कहानी

लुहाच वंश के संकलित इतिहास का परिचय: नाँधा में लाल सिंह का परिवार, गाँवों तक प्रवास और अभिलेखों से वंशावली तक।

आवाज़ और कैप्शन: हिन्दी

वीडियो का पूरा पाठ (हिन्दी)

हर वंश की कहानी में कुछ नाम दर्ज हैं, और कुछ आवाज़ें छूट गई हैं।

लुहाच वंश के संकलित इतिहास में लाल सिंह के परिवार का नाँधा में बसना दर्ज है।

उस शुरुआती परिवार में पत्नी और बहुएँ भी थीं।

पीढ़ियाँ बढ़ीं, और परिवार अलग-अलग गाँवों में बसे।

यह कहानी बही-भाटों और समुदाय के अभिलेखों में संजोई गई है।

आज हम इसे पढ़ सकते हैं, परिवार की दर्ज कड़ियाँ देख सकते हैं, और छूटी जानकारी जोड़ने का अनुरोध भेज सकते हैं।

आइए, अपनी जड़ों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाएँ।

स्रोत: कर्नल कर्मबीर सिंह लुहाच, 'लुहाच वंश का इतिहास', 21 मई 2025 (P5, P114–P130); वेबसाइट संग्रह की सार्वजनिक तस्वीरें; मूल वंशावली चित्र।

हमारी जड़ों से एक कहानी

पुरखों की राह, पीढ़ियों की कहानी

एक वंश, अनेक बस्तियाँ। लुहाच परिवार के पुराने अभिलेख और भाट परंपरा जड़ों, रिश्तों और अलग-अलग इलाकों में बसने के सफ़र की कहानी संजोते हैं।

322 अनुच्छेद0 तस्वीरें
01

इतिहास और वंशावली का समन्वय

इतिहास और वंशावली के पूरक संबंधों को स्पष्ट करते हुए लेखक ने लुहाच गोत्र के इतिहास और समाज में इसके स्थान का परिचय दिया है।

02

नाँधा में स्थाई निवास और वंशावली संकलन

लाल सिंह द्वारा 865 ईस्वी में नाँधा में बसने, 46 गाँवों में विस्तार और भाट अभिलेखों की मदद से तैयार की गई वंशावली का विवरण मिलता है।

03

चौहान वंश का उद्गम और शासक

माउंट आबू के अग्निकुंड की परंपरा से चौहान वंश की उत्पत्ति तथा उसके विभिन्न शासकों के शासनकाल की सूची दी गई है।

04

चौहान राज्य और इतिहास के स्रोत

चौहान साम्राज्य के प्रमुख क्षेत्रों और उनके इतिहास को प्रमाणित करने वाले विभिन्न शिलालेखों, अभिलेखों तथा महाकाव्यों की चर्चा की गई है।

05

इतिहास लेखन के माध्यम और बही भाट परंपरा

प्राचीन लेखन माध्यमों के विकास और लुहाच वंश की वंशावली को पीढ़ी-दर-पीढ़ी दर्ज करने वाले बही भाट परिवार की परंपरा बताई गई है।

06

नर देव से लाल सिंह तक का संघर्षपूर्ण प्रवास

नागौर, चित्तौड़गढ़, सांभर और अजमेर से होते हुए परिवार के सदस्यों के प्रवास तथा कुलदेवी के संकेतों से जुड़े वृत्तांत दिए गए हैं।

07

जड़वा का संघर्ष और गोत्र परिवर्तन

जड़वा में मीठे पानी की प्राप्ति, तोमर राजपूतों के साथ हुआ संघर्ष और लुहाच गोत्र व जाट पहचान अपनाने का विवरण दर्ज है।

08

नाँधा की स्थापना और जीवन यापन

865 ईस्वी में टीबे पर छड़ी गाड़कर नाँधा गाँव की नींव रखने, खेड़ा की स्थापना और कुआं खोदकर खेती शुरू करने का वर्णन है।

09

कुचेसर जाट रियासत का इतिहास

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलाल गोत्र के सरदारों द्वारा कुचेसर रियासत की स्थापना, उसके शासकों और बाद के कानूनी विवादों का लेखा-जोखा है।

10

नाँधा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विस्थापन

नाँधा से निकले पहले और दूसरे जत्थों द्वारा संसाधनों की खोज में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न गाँवों में बसने की यात्रा वर्णित है।

हर परिवार की कहानी मायने रखती है।

अपने गाँव की जानकारी, परिवार का छूटा हुआ रिश्ता या किसी प्रियजन की स्मृति साझा करें।

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