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नान्धा

चरखी दादरी · हरियाणा

हरियाणा के चरखी दादरी जिले की बाढड़ा तहसील में बसा नाँधा एक ऐतिहासिक गाँव है। स्थानीय परंपरा बताती है कि 865 ईस्वी में लाल सिंह लुहाच ने इस गाँव की नींव रखी थी।

22 अनुच्छेद10 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
नान्धा — सामूहिक आयोजन

सामूहिक आयोजन · हमारे संग्रह से 1 / 2

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गाँव की प्रारंभिक बसावट खेड़ा टीले पर हुई थी, जो बाद में 14वीं शताब्दी तक निचले इलाके में स्थानांतरित हो गई।

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गाँव का रकबा लगभग 20,000 बीघा है और इसकी आबादी में प्रमुख रूप से लुहाच गौत्र के साथ अन्य समुदाय शामिल हैं।

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सूखे और पानी की कमी के चलते 16वीं शताब्दी से विभिन्न पीढ़ियों के लुहाच परिवारों का अन्य क्षेत्रों में विस्थापन दर्ज है।

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गाँव की स्थापना और प्रारंभिक इतिहास

गाँव की नींव 865 ईस्वी में लाल सिंह लुहाच द्वारा खेड़ा नामक टीले पर रखी गई थी। समय के साथ 14वीं शताब्दी के अंत तक खेड़ा खाली हो गया और आबादी निचले इलाके में बस गई।

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भौगोलिक स्थिति, संसाधन और सामाजिक संरचना

गाँव की सीमा बहुत बड़ी है और इसके पास लगभग 20,000 बीघा जमीन है। यहाँ लगभग 5000 की आबादी में लगभग आधी आबादी लुहाच गौत्र की है, और गाँव में कई पुराने मंदिर व बुनियादी सुविधाएँ हैं।

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विस्थापन का दौर और कारण

सैकड़ों वर्षों तक कोई प्रवास नहीं हुआ, लेकिन सूखे के कारण 20वीं पीढ़ी से परिवारों ने जलस्रोतों की ओर विस्थापन शुरू किया। गुगन, पहाड़ सिंह और भैराज लुहाच ने सर्वप्रथम पलायन किया।

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प्रवास का कालक्रम और ब्योरा

अभिलेख में 1500 ईस्वी से 1875 ईस्वी तक नाँधा से विभिन्न क्षेत्रों में बसे लुहाच परिवारों और उनके गंतव्यों की सूची दी गई है।

हर परिवार की कहानी मायने रखती है।

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