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गिरावड़

रोहतक · हरियाणा

रोहतक जिले का गिरावड़ गाँव अपने कई गोत्रों, पाँच पाना व्यवस्था और साझी विरासत के लिए पहचाना जाता है। गाँव के पुराने अभिलेख यहाँ के पारिवारिक इतिहास, प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक तालाबों को सहेजे हुए हैं।

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गिरावड़ — गाँव का मंदिर

गाँव का मंदिर · हमारे संग्रह से 1 / 5

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गिरावड़ की स्थापना और पाँच पाना (लुहाच, कालवाण, नाथाण, मूँडाण, पिथाण) में भूमि विभाजन का इतिहास।

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लुहाच और अन्य गोत्रों का आगमन, पीढ़ियों का विस्तार तथा बाहर प्रवास का विवरण।

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गाँव के सात प्रमुख मंदिर, जिनमें बाबा बाढ़ी वाला धाम व राधा स्वामी मंदिर शामिल हैं, और 15 तालाब।

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गिरावड़ का परिचय और पाँच पाना

रोहतक की महम तहसील में स्थित गिरावड़ गाँव पाँच पाना में विभाजित है और इसके पास 21000 बीघा नहरी भूमि है। इसके चारों ओर पक्की सड़कों और रेलवे स्टेशनों का संपर्क है।

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आरंभिक इतिहास और विभिन्न गोत्रों का आगमन

गाँव की नींव राठी गोत्र ने रखी थी, जिसके बाद धाँधी, लुहाच और बाद में बलहरा गोत्र के पूर्वज यहाँ आकर बसे। बलरा से आए चार भाइयों के वंशजों से चार अलग पाना बने।

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लुहाच वंश का विस्तार और प्रवास

लुहाच परिवार की पीढ़ियों में धीरे-धीरे विस्तार हुआ और 15वीं पीढ़ी में कई शाखाएं विकसित हुईं। बाद के वर्षों में कुछ सदस्य निकटवर्ती गाँवों व अन्य राज्यों में जाकर बस गए।

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गाँव के प्रमुख मंदिर और तालाब

गिरावड़ में सात प्रमुख मंदिर हैं, जिनमें बाढ़ी वाला, राधा स्वामी और शिवालय शामिल हैं। गाँव में करण सरोवर सहित 15 तालाब भी दर्ज हैं।

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बाबा बाढ़ी वाला धाम की परंपरा

अभिलेख के अनुसार घने जंगल में साधु की समाधि के बाद उस स्थान को बाबा की मूढ़ी के रूप में पूजा जाने लगा। समय के साथ वहाँ भूमि छोड़ी गई, तालाब खोदा गया और बाद में मंदिर का निर्माण हुआ।

हर परिवार की कहानी मायने रखती है।

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