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रीवाड़ी खेड़ा

झज्जर · हरियाणा

झज्जर जिले का रेवाड़ी खेड़ा गाँव अपनी बसावट की एक दिलचस्प दास्तान समेटे है। गाँव के अभिलेख बताते हैं कि आसोदा से आए दलाल परिवार और नीमली से आए उनके दामाद बीरू राम लुहाच ने मिलकर इस बस्ती को आबाद किया था।

18 अनुच्छेद2 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
रीवाड़ी खेड़ा — सामूहिक आयोजन

सामूहिक आयोजन · हमारे संग्रह से 1 / 1

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रेवाड़ी खेड़ा झज्जर जिले की बहादुरगढ़ तहसील में स्थित एक गाँव है जहाँ मुख्य रूप से दलाल और लुहाच गोत्र के परिवार रहते हैं।

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गाँव में लगभग 6000 बीघा नहरी जमीन, बुनियादी सार्वजनिक सुविधाएँ और प्रमुख मंदिर मौजूद हैं।

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परंपरा के अनुसार, आसोदा के एक जमींदार ने अपनी पुत्री पातो और दामाद बीरू राम लुहाच को यहाँ लाकर बसाया था।

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गाँव का परिचय और वर्तमान स्थिति

रेवाड़ी खेड़ा झज्जर जिले की बहादुरगढ़ तहसील का एक मध्यम आबादी वाला गाँव है, जो अन्य कई गाँवों से सड़कों द्वारा जुड़ा हुआ है। गाँव में लगभग 6000 बीघा नहरी भूमि, स्कूल, औषधालय, चौपालें और प्रमुख मंदिर स्थित हैं, जहाँ दलाल और लुहाच गोत्र के लोग निवास करते हैं।

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पातो देवी और निमली का परिवेश

गाँव के लुहाच परिवार के पूर्वज चरखी दादरी के निमली गाँव से संबंधित माने जाते हैं, जहाँ बीरू राम का विवाह आसोदा की पातो देवी से हुआ था। निमली में कँटीली घास और बंजर परिस्थितियों की कठिनाइयों के चलते पातो देवी का मन वहाँ नहीं लगा।

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मायके में आग्रह और पिता का निर्णय

पातो देवी ने अपने मायके आकर कठिनाइयों के कारण दोबारा निमली जाने से इनकार कर दिया। अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और बेटी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उसके पिता ने आसोदा छोड़कर तत्कालीन उजड़े हुए रेवाड़ी खेड़ा में जमीन लेने का फैसला किया।

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रेवाड़ी खेड़ा की स्थापना और बसावट

पातो के पिता ने रेवाड़ी खेड़ा में जमीन खरीदी और लगभग 1775 ईस्वी में अपने दामाद बीरू राम को भी यहाँ बुलाकर जमीन दी। इसी कारण आज इस गाँव में दलाल और लुहाच गोत्र के लोग बसे हैं, जहाँ बीरू राम की ग्यारहवीं पीढ़ी चल रही है।

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