अलखपुरा
भिवानी · हरियाणा
भिवानी जिले की तोशाम तहसील में बसा अलखपुरा एक शांत और पारंपरिक गाँव है। सामुदायिक अभिलेखों के मुताबिक, यहाँ के लुहाच परिवार लगभग 1850 ईस्वी में नाँधा गाँव छोड़कर यहाँ आकर बसे थे।
गाँव का रकबा सुंदर ब्रांच नहर के भूड़ताना रजबाहा से सिंचित होने के कारण काफी उपजाऊ है।
अभिलेख के अनुसार, पानी की कमी के कारण नाँधा से रामसुख लुहाच लगभग 1850 ईस्वी में अलखपुरा आए थे।
गाँव का परिचय और भूगोल
अलखपुरा भिवानी जिले की तोशाम तहसील का एक गाँव है। यहाँ नहरी सिंचाई उपलब्ध है और गाँव में स्कूल, पशु चिकित्सालय, मंदिर तथा जोहड़ जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं।
लुहाच वंश का इतिहास
परंपरागत विवरण के अनुसार, पानी की किल्लत के चलते रामसुख लुहाच लगभग 1850 ईस्वी में नाँधा से अलखपुरा आए थे। वर्तमान में इस गाँव में उनके वंश की सातवीं पीढ़ी निवास कर रही है।
01गाँव का परिचय और भूगोल
अलखपुरा गाँव का इतिहास
अलखपुरा गाँव हरियाणा के भिवानी जिले की तोशाम तहसील का एक मध्यम आबादी वाला गाँव है।यह तहसील मुख्यालय से 5 किलो मीटर और जिला मुख्यालय से 26 किलो मीटर दूर स्थित है। यह गाँव हाँसी-तोशाम मार्ग पर पड़ता है। गाँव का सारा रकबा नहरी होने के कारण काफी उपजाऊ है। सुंदर ब्रांच नहर के भूड़ताना रजबाहा से पूरे रकबे की सिचाई होती है। गाँव का कुल रकबा 10000 एकड़ है जिसमें से 25 एकड़ लुहाच गौत्र के लोगों की है। गाँव की कुल आबादी लगभग 3200 लोगों की है जिसमें से 10 परिवार लुहाच गौत्र के लोगों के हैं। इस गाँव में लुहाच के अतिरिक्त दलाल, महला और कादियान गौत्र के लोग भी रहते हैं। इसके पूर्व में सागवान, दक्षिण में तोशाम, पश्चिम में केरावड़ और उतर में भूड़ताना गाँव की सीमा लगती है। सब गाँव पक्की सड़क से जुड़े हैं। गाँव में एक माध्यमिक स्कूल, एक पशु चिकित्सालय, दो मंदिर और एक जोहड़ है।
02लुहाच वंश का इतिहास
अलखपुरा के लुहाच पूर्वज चरखी दादरी के नाँधा गाँव से आए थे। नाँधा एक बरानी गाँव था। भोगोलिक स्थिति राजस्थान जैसी थी। खेती और पीने के पानी की किल्लत थी। इसी कारण कालांतर में उतर और पूर्व दिशा में काफी परिवारों का विस्थापन हुआ।नाँधा की वंशावली के अनुसार 31 वीं पीढ़ी के किशोरा राम के तीन पुत्र थे। इनके नाम धारीराम, रामसुख और रामरतन थे।धारी राम का बेटा गीदा राम सालहेवाल चला गया और बाकी परिवार नाँधा में ही रह गया। राम रत्न का परिवार भी नाँधा में ही रह गया जबकि राम सुख अपने परिवार समेत लगभग 1850 ईस्वी में तोशाम के पास अलखपुरा में आ गया। हालांकि अलखपुरा की जमीन भी उस समय बारानी होती थी लेकिन पानी के हिसाब से नाँधा से बेहतर थी। सुंदर ब्रांच नहर के आने के बाद सेइस गाँव का पूरा रकबा नहरी बन गया है। हालांकि अलखपुरा में लुहाच गौत्र के लोगों की कम आबादी है लेकिन जमीन और नोकरी पेशा के हिसाब से खुशहाली है। राम सुख लुहाच से अब तक इस गाँव में लुहाच परिवार की 7 वीं पीढ़ी चल रही है।
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