उझाणा
जिन्द · हरियाणा
हरियाणा के जींद जिले में बसा उझाणा गाँव अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यहाँ के स्थानीय भूगोल, सुविधाओं और सामाजिक परिवेश के साथ-साथ अभिलेख बताते हैं कि लुहाच परिवार के पूर्वज लगभग 1775 ईस्वी में यहाँ आकर बसे थे।
उझाणा जींद जिले की नरवाना तहसील में स्थित एक बड़ा गाँव है, जिसमें कई गोत्रों के लोग रहते हैं और विविध जनसुविधाएँ उपलब्ध हैं।
परंपरा के अनुसार, हुक्मा राम लुहाच के पुत्र किसाली (ख्याली) राम नाँधा से प्रवास कर उझाणा में आकर बसे थे।
लगभग 1775 ईस्वी में उझाणा में बसने के बाद, इस परिवार के वंशजों ने 1875 ईस्वी में निकटवर्ती गाँव ढूँढ़वा में भी जमीन ली।
गाँव का परिचय और अवस्थिति
उझाणा जींद जिले की नरवाना तहसील में दिल्ली-पटियाला राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित लगभग 25000 की आबादी वाला गाँव है। यहाँ नहरी सिंचाई, दो सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अस्पताल, कई पंचायत घर और मंदिर जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं।
किसाली राम का प्रवास
विवरण के अनुसार, नाँधा गाँव से किसाली राम पानी की तलाश में निकले और चिड़ी गाँव में बसने से मना किए जाने के बाद उझाणा पहुँचे। उझाणा के निवासियों ने इस परिवार का स्वागत किया और उन्हें रहने व खेती के लिए भूमि दी।
लुहाच परिवार का विस्तार
अभिलेख के अनुसार, लगभग 1775 ईस्वी में ख्याली राम का परिवार उझाणा में बसा और उनके बेटे बुध राम व मामराज हुए। वर्ष 1875 में दोनों भाइयों ने पास के गाँव ढूँढ़वा में जमीन खरीदी, जिससे उनके वंशज दोनों गाँवों में फैल गए।
01गाँव का परिचय और अवस्थिति
उझाणा गाँव का इतिहास
उझाणा गाँव हरियाणा के जींद जिले की नरवाना तहसील का एक बहुत बड़ा गाँव है जो कि जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर और तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में दिल्ली-पटियाला राष्ट्रीय राज मार्ग पर स्थित है। इस गाँव के उत्तर में पिपलथा, गढ़ी, नेपेवाला, पूर्व में ढूँढ़वा, कोल, कराड़, अंभरसर, दक्षिण में बेलरखा और पश्चिम में खरल गाँव की सीमा लगती है। इस गाँव में लुहाच गौत्र के अतिरिक्त चहल, सीहमार, ढीलायन, मलिक, गिल, चौहान, मोर और खरटे गौत्र के लोग भी रहते हैं। इस गाँव का खेड़ा सिहमार गौत्र का है। इस गाँव की आबादी लगभग 25000 लोगों की है जिसमें से 25 परिवार लुहाच गौत्र के हैं। गाँव के पूर्व में कैथल की जिला सीमा और उत्तर में पंजाब की प्रांतीय सीमा लगती है। गाँव की पूरी जमीन नहरी है जिसकी सिंचाई धनतान माइनर व दरोधी माइनर से होती है। उझाणा में एक लड़कों के लिए और एक लड़कियों के लिए सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एक हस्पताल और एक पशु चिकित्सालय, चार जोहड़, एक उझाणा की खाप पंचायत घर के अलावा आठ अन्य पंचायत घर और दो बड़े मंदिर हैं।
02किसाली राम का प्रवास
चरखी दादरी जिले के नाँधा गाँव के 31 वीं पीढ़ी के हुक्मा राम लुहाच का पुत्र किसाली (ख्याली) राम नाँधा से अपने परिवार के साथ पानी की तलास में महम होते हुए लाखनमाजरा के पास चिड़ी गाँव में आ गया । चिड़ी गाँव मुस्लिम बाहुल्य था। इस गाँव की जमीन समतल व उपजाऊ थी। खेती के लिए जमीनी पानी भी मीठा था। इसलिए किशाली ने गाँव के लोगों से चिड़ी में रहने के लिए जमीन मांगी लेकिन गाँव वालों ने किशाली को हिन्दू परिबर होने के नाते यहां रहने के लिए मना कर दिया। इस किए किशाली राम यहाँ से जींद होते हुए नरवाना के पास उझाणा गाँव में आ गया। यह गाँव पंजाब का तराई का इलाका था। पानी की कोई कमी नहीं थी। गाँव में सब हिन्दू परिवार के सिहमार, चहल, ढिल्लन गौत्र के लोग रहते थे। इस लिए लोगों ने खुशी से इस महमान परिवार को रहने के लिए जमीन और खेती के लिए भी जमीन दे दी। इस प्रकार किशाली का परिवार यहीं पर बस गया।
03लुहाच परिवार का विस्तार
इस प्रकार लगभग 1775 ईस्वी में पहला लुहाच परिवार उझाणा गाँव में आकर बस। किसाली का उप नाम ख्याली राम था। खयाली राम के दो बेटे बुध राम और मामराज थे। लगभग अगले 100 साल तक दोनों भाइयों के वंशज इसी गाँव में रहे। उसके बाद 1875 ईस्वी में दोनों भाइयों ने पास के गाँव ढुँढवा में जमीन खरीद ली और बाद में दोनों भाइयों के कुछ वंशज ढुँढ़वा में रहने लगे। इस प्रकार दोनों भाइयों के वंशज दोनों गाँव में रहते हैं।
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