नंगला उगरसैन
बुलन्दशहर · उत्तर प्रदेश
बुलन्दशहर जिले का उग्रसेन गाँव अपने भूगोल, स्थानीय परिवेश और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। सामुदायिक परंपरा के अनुसार, नाँधा से आए लुहाच गोत्र के उग्रसैन ने इस बस्ती की नींव रखी थी।
गाँव बुलन्दशहर जिले की सियाना तहसील में स्थित है, जहाँ गेहूँ और गन्ना मुख्य फसलें हैं।
यहाँ विभिन्न गोत्रों और जातियों के लोग रहते हैं तथा गाँव में मंदिर, तालाब, स्कूल और गौशाला मौजूद हैं।
परंपरा के अनुसार, कुचेसर के राजा की अनुमति के बाद उग्रसैन ने यहाँ बसकर नंगला उग्रसैन की नींव रखी।
गाँव का परिचय और भूगोल
उग्रसेन बुलन्दशहर जिले की सियाना तहसील का एक मध्यम आकार का गाँव है। लगभग 2000 बीघा उपजाऊ भूमि वाले इस गाँव में गेहूँ और गन्ना मुख्य फसलें हैं।
सामाजिक संरचना और सुविधाएँ
गाँव में लुहाच के साथ-साथ कई अन्य गोत्र और समुदाय सद्भाव से रहते हैं। यहाँ पाँच मंदिर, तीन तालाब, एक प्राथमिक विद्यालय, एक चौपाल और एक गौशाला जैसी सुविधाएँ हैं।
गाँव की स्थापना का इतिहास
पारंपरिक विवरण के अनुसार, नाँधा से आए तीन भाइयों में से उग्रसैन ने कुचेसर के राजा से अनुमति लेकर यहाँ डेरा डाला। बाद में यह आबादी नंगला उग्रसैन के नाम से प्रसिद्ध हुई।
01गाँव का परिचय और भूगोल
उग्रसेन गाँव का इतिहास
उग्रसेन गाँव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले की सियाना तहसील का एक मध्यम आबादी वाला गाँव है जो कि जिला मुख्यालय से 40 किलो मीटर और तहसील मुख्यालय से 15 किलो मीटर दूर स्थित है। देश की राजधानी नई दिल्ली से यह गाँव 65 किलो मीटर दक्षिण पूर्व में राष्ट्रीय राज मार्ग 24 से महज 7 किलो मीटर पश्चिम दिशा में है। गढ़ गंगा जो कि हिंदुओं का पवित्र धार्मिक स्थल है इसके 24 किलो मीटर दक्षण पूर्व में है। इसके पूर्व में कुचेसर किला, पश्चिम में नली हुसैनपुर, उत्तर में कटक और दक्षिण में लूडपूरा गाँव की सीमा लगती है। सब गाँवोँ से पक्की सड़क से संपर्क है। इस गाँव का कुल रकबा लगभग 2000 बीघा है जिसमें से लुहाच परिवार के पास 1500 बीघा जमीन है। जमीन समतल व उपजाऊ है। सिंचाई ट्यूबवेल के आलावा मध्य गंगा नहर और इसी नहर से निकले एक रजबाहा से होती है। गेहूँ और गन्ना इस गाँव की मुख्य फसलें हैं। गन्ना की पिराई सीमभावली मील में की जातीहै जो कि गाँव से 16 किलो मीटर दूर स्थित है।
02सामाजिक संरचना और सुविधाएँ
लुहाच के अतिरिक्त इस गाँव में सिंघानिया, मलिक, राणा, पायल और डुलट गौत्र के लोग भी रहते हैं। जाट के आलावा अन्य समाज जैसे ब्राह्मण, जाटव, बाल्मीकि, गडरिया और लोध राजपूत भी रहते हैं। सब जाति के लोग प्रेम व सद्भावना से रहते हैं। इस गाँव में 5 मंदिर, 3 तालाब, 1 प्राथमिक स्कूल, 1 चौपाल, 1 आंगणबाड़ी केन्द्र, 1 पीने के पानी की टंकी और 1 गौशाला है।
03गाँव की स्थापना का इतिहास
इस गाँव के प्रथम लुहाच पुरुष उग्रसैन नाँधा से पश्चिमी उत्तरप्रदेश के लिए निकले पहले जत्था का हिस्सा थे। नाँधा वंशावली की 29 वीं पीढ़ी के दुलारो राम के तीन बेटे थे। तीनों भाई पहले जत्थे के तहत यमुना पर कर कुचेसर के पास नली हुसैनपर पहुँच गए। यहाँ आकर पता चला कि कुचेसर रियासत का राजा दलाल गौत्र से हैं और राजा के पूर्वज हरियाणा से आए थे। तीनों भाइयों ने राजा से अपनी रियासत में रहने के लिए जगह और खेती के लिए जमीन मांगी। राजा ने यहाँ से कुछ किलो मीटर आगे एक नंगला में डेरा डालने की इजाजत दे दी। तीनों भाई इस नंगला पर रुक गए। जगह पसंद आ गई। तीनों भाइयों ने योजना बनाई कि एक भाई यहाँ रुक जाए और बाकी के दो भाई और आगे चल कर कोई दूसरी जगह जाकर देखते हैं। इस प्रकार उग्रसैन इसी जगह पर रुक गया। उस समय यहाँ कोई बसती नहीं थी। धीरे धीरे आबादी बढ़ने लगी और कालान्तर में एक गाँव का रूप ले लिया। इस लिए इस गाँव का नाम नंगला उग्रसैन रखा गया। क्योंकि इस नंगला को उग्रसैन ने बसाया था इस लिए इसका खेड़ा लुहाच के नाम से है। बाद में इसी गाँव की 37 वीं पीढ़ी से काले सिंह सपरिवार खाद मोहन नगर जाकर बस गया।
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