भंडोली
बुलन्दशहर · उत्तर प्रदेश
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में भंडोली गाँव स्थित है। स्थानीय अभिलेखीय परंपरा इस गाँव की बसावट का श्रेय लुहाच वंश के पूर्वज होराम को देती है।
भंडोली की आबादी लगभग 4,000 है, जिसमें मुख्य रूप से लुहाच गोत्र के परिवार शामिल हैं और यहाँ गन्ने की खेती प्रमुख है।
परंपरा के अनुसार, नाँधा वंशावली के तीन भाई कुचेसर रियासत पहुँचे थे, जहाँ से अलग होकर विभिन्न गाँवों की स्थापना हुई।
होराम भंडोली में बसे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य मुरादाबाद के ज्ञानपुर और बरेली के मोहम्मदपुर जाटान चले गए।
गाँव का परिचय और भूगोल
भंडोली बुलंदशहर से 9 किलोमीटर दूर स्थित उपजाऊ भूमि वाला गाँव है, जहाँ की मुख्य फसल गन्ना है। यहाँ लगभग 4000 की आबादी है, जिसमें आधी आबादी लुहाच गोत्र की है और गाँव में बुनियादी सार्वजनिक सुविधाएँ मौजूद हैं।
प्रवास और नंगला उग्रसैन की स्थापना
नाँधा वंशावली के तीन भाई यमुना पार कर कुचेसर रियासत पहुँचे और राजा से खेती व रहने की जमीन माँगी। राजा की अनुमति से एक भाई उग्रसैन एक नंगला में रुक गए, जो बाद में नंगला उग्रसैन के नाम से विकसित हुआ।
भंडोली का बसना और आगे का विस्तार
होराम अपने परिवार के साथ भंडोली पहुँचे और वहीं बस गए, जहाँ अब उनकी 40वीं पीढ़ी रहती है। उनके एक पुत्र हेत राम भंडोली में रहे, जबकि जोहरी और बीरम सिंह आगे ज्ञानपुर और मोहम्मदपुर जाटान में बस गए।
01गाँव का परिचय और भूगोल
भंडोली गाँव का इतिहास
भंडोली गाँव पश्चिमी उतर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले का एक मध्यम आबादी का गाँव है जो कि जिला मुख्यालय से 9 किलो मीटर दूर है। इसके पूर्व में जोलीगढ़, पश्चिम में गूथावली और लुहारली, दक्षिण में धमेड़ा और उत्तर में बरारी और मनोहर गढ़ी गाँव की सीमा लगती है। सब गाँव से पक्की सड़क से संपर्क है। गाँव का कुल रकबा 6000 बीघा है जिसमें से लुहाच परिवार के पास लगभग आधा रकबा यानि 3000 बीघा है। पूरा रकबा समतल व उपजाऊ है। सिंचाई ट्यूबवेल और नहर के पानी से होती है। गन्ना इस गाँव की मुख्य फसल है। गन्ना की सप्लाई अगुता गन्ना मील और साबितगढ़ गन्ना मील में होती है जो कि क्रमश 8 किलो मीटर और 50 किलो मीटर दूर हैं। गाँव की सीमा से एक रजबाहा गुजरता है जिसे पवसरा रजबाहा के नाम से जाना जाता है। भंडोली गाँव की कुल आबादी लगभग 4000 लोगों की है जिसमें से लुहाच गौत्र के लोगों की आबादी लगभग 2000 लोगों की है। इस गाँव में लुहाच के आलावा पवार और धूलिया गौत्र के लोग भी रहते हैं। गाँव में 5 मंदिर, 5 तालाब, 1 प्राथमिक स्कूल,1 चौपाल और 1 आंगणबाड़ी केन्द्र हैं।
02प्रवास और नंगला उग्रसैन की स्थापना
इस गाँव के प्रथम लुहाच पुरुष होराम नाँधा से पश्चिमी उत्तरप्रदेश के लिए निकले पहले जत्था का हिस्सा थे। नाँधा वंशावली की 29 वीं पीढ़ी के दुलारो राम के तीन बेटे थे। तीनों भाई पहले जत्थे के तहत यमुना पर कर कुचेसर के पास नली हुसैनपर पहुँच गए। यहाँ आकर पता चलाकि कुचेसर रियासत का राजा दलाल गौत्र से हैं और राजा के पूर्वज हरियाणा से आए थे। तीनों भाइयों ने राजा से अपनी रियासत में रहने के लिए जगहऔर खेती के लिए जमीन मांगी।
राजा ने यहाँ से कुछ किलो मीटर आगे एक नंगला में डेरा डालने की इजाजत दे दी। तीनों भाई इस नंगला पर रुक गए। जगह पसंद आ गई। तीनों भाइयों ने योजना बनाई कि एक भाई यहाँ रुक जाए और बाकी के दो भाई और आगे चल कर कोई दूसरी जगह जाकर देखते हैं। इस प्रकार उग्रसैन इसी जगह पर रुक गया। उस समय यहाँ कोई बसती नहीं थी। धीरे धीरे आबादी बढ़ने लगी और कालान्तर में एक गाँव का रूप ले लिया। इस लिए इस गाँव का नाम नंगला उग्रसैन रखा गया। क्योंकि इस नंगला को उग्रसैन ने बसाया था इस लिए इसका खेड़ा लुहाच के नाम से है।
03भंडोली का बसना और आगे का विस्तार
होराम और जोहरी के परिवार का कारवाँ यहाँ से और आगे बढ़ा और बुलन्दशहर के पास भंडोली पहुँच गया। जगह रहने लायक देख कर होराम ने यही बसने का मन बना लिया। इस प्रकार होराम का परिवार यहीं पर बस गया। होराम के दो बेटे थे। उनके नाम हेत राम और बीरम सिंह थे। हेत राम यहीं पर रह गया जब कि उसका भाई बीरम सिंह अपने ताऊ जोहरी के साथ आगे बढ़ गया। दोनों परिवार यहाँ से आगे गहना होते हुए मुरादाबाद जिले के ज्ञानपुर गाँव में पहुँच गए। जोहरी यहीं पर बस गया जबकि बीरम सिंह बरेली के पास मोहम्मदपुर जाटान गाँव में जाकर बस गया। भंडोली में लुहाच परिवार की 40 वीं पीढ़ी चल रही है।
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