अमरपुर
मेरठ · उत्तर प्रदेश
मेरठ जिले का अमरपुर गाँव अपनी खास बसावट और आबादी के लिए जाना जाता है। गाँव की मौखिक परंपराओं और अभिलेखों में यहाँ आकर बसे लुहाच गोत्र के परिवारों का इतिहास, उनके सफर की यादें और पुश्तैनी वंशावली सहेजकर रखी गई हैं।
अमरपुर मेरठ जिले की मवाना तहसील में गंगा किनारे स्थित लगभग 3000 की आबादी वाला गाँव है।
अभिलेख के अनुसार यहाँ के लुहाच पूर्वज लगभग 1850 ईस्वी में नली हुसैनपुर और गढ़ी गुलडहर से आकर बसे थे।
दिलावर सिंह और बेदकोर के विवाह तथा जमीन बँटवारे से जुड़े पारिवारिक इतिहास का उल्लेख मिलता है।
गाँव का परिचय और भूगोल
अमरपुर मेरठ की मवाना तहसील का एक गाँव है जिसकी आबादी लगभग 3000 है और इसमें विभिन्न गौत्रों के लोग रहते हैं। गाँव का कुल रकबा 3200 बीघा है जिसमें से 350 बीघा जमीन लुहाच गौत्र के पास है।
पूर्वजों का निकास और गढ़ी गुलडहर आगमन
अभिलेख के अनुसार लुहाच पूर्वज 1850 ईस्वी के आसपास नली हुसैनपुर और गढ़ी गुलडहर से आए थे। धूम सिंह के पाँच बेटों में से अधिकांश भाई गढ़ी गुलडहर चले गए थे।
अमरपुर में बसावट और पारिवारिक घटनाक्रम
इन्दराज सिंह और रामजी लाल गढ़ी गुलडहर से अमरपुर आकर बसे। बाद में इन्दराज का परिवार समसपुर चला गया, जबकि रामजी लाल के पुत्रों रघुबीर और दिलावर के संबंध में पारिवारिक विवरण दर्ज हैं।
बसाऊ का परिवार और बेदकोर का विवाह
बसाऊ के पोते रामदास का परिवार अमरपुर आया और उनकी असमय मृत्यु के बाद गर्भवती बेदकोर का विवाह दिलावर सिंह से कराया गया।
संतान और भूमि बँटवारा
बेदकोर से रामदास के पुत्र विजयपाल का जन्म हुआ जिसे जमीन का हिस्सा दिया गया, और बाद में दिलावर से दो अन्य पुत्र हुए। इस तरह अमरपुर में दोनों शाखाओं का विस्तार हुआ।
01गाँव का परिचय और भूगोल
अमरपुर गाँव का इतिहास
अमरपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ जिले की मवाना तहसील का गंगा किनारे बसा एक छोटा सा गाँव है। यह जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर पूर्व दिशा में और तहसील मुख्यालय से 25 किलोमीटर दक्षिण दिशा में दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-लखनऊ राजमार्ग के मध्य स्थित है। इसके पूर्व में माछरा, कासमपुर और नगली अब्दुल्ला, पश्चिम में भटीपुर, उत्तर में खंडरावली और पसबाड़ा, दक्षिण में हसनपुर कलाँ गाँव की सीमा लगती है। सब गाँव से पक्की सड़क मार्ग से संपर्क है।इसका नजदीकी रेलवे स्टेसन मेरठ छावनी है जो कि27 किलोमीटर दूर है। इस गाँव की कुल आबादी लगभग 3000 लोगों की है जिसमें लगभग 150 लुहाच गौत्र के लोग रहते हैं। इस गाँव में लुहाच के अलावा काजला, दुलट, हुड्डा, सांगवान, राणा और मलिक गौत्र के लोग रहते हैं। अमरपुर गाँव का कुलरकबा लगभग 3200 बीघा है जिसमें से 350 बीघा जमीन लुहाच गौत्र के लोगों के पास है।
02पूर्वजों का निकास और गढ़ी गुलडहर आगमन
इस गाँव के लुहाच पूर्वजों की निकासी हापुड़जिले के नली हुसैनपुर गाँव और गाजियाबाद जिले के गढ़ी गुलडहर गाँव से लगभग 1850 ईस्वी में हुई थी। नली हुसैनपुर गाँव की वंशावली पीढ़ी संख्या 33पर धूम सिंह के पाँच बेटे थे। इनके नामझँडू राम, बसाऊ राम, शेर सिंह, मान सिंह और गुलाब सिंह थे। बसाऊ को छोड़कर बाकी भाई गाजियाबाद जिले के गढ़ी गुलडहर में चले गए। शेर सिंह और झँडू राम अविवाहित थे।
03अमरपुर में बसावट और पारिवारिक घटनाक्रम
35 वीं पीढ़ी के इन्दराज सिंह सुपुत्र मान सिंह और रामजी लाल सुपुत्र गुलाब सिंह गढ़ी गुलडहर से सपरिवार अमरपुर आकर बस गए। इन्दराज ने यहाँ आकर अपनी बेटी बीजेन्दरी की शादी मेरठ जिले के समसपुर गाँव में कर दी। बेटी की शादी के बाद इन्दराज स्वर्ग सिधार गए। इसके बाद बीजेन्दरी ने अपने सभी भाई-बहनों को अपने पास बुला लिया। इसप्रकार बिजेंद्र सिंह सुपुत्र इन्दराज अमरपुर से समसपुर जाकर बस गया।
रामजी लाल ने अमरपुर में 300 बीघा जमीन खरीद ली। उसके दो बेटे रघुबीर सिंह और दिलावर सिंह हुए। दिलावर सिंह की शादी मुकुंदी देवी से हुई थी। मुकुंदी एक लड़की को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई। अब दिलावर सिंह के कोई लड़का नहीं था। इसी दौरान गाँव में एक और घटना घटित हुई जिसका संबंध दिलावर सिंह से है।
04बसाऊ का परिवार और बेदकोर का विवाह
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि नली हुसैनपुर से धूम सिंह के चार बेटे गढ़ी गुलडहर चले गए थे और एक बेटा बसाऊ वहीं पर रह गया। बसाऊ ने अपने इकलौते बेटे नारायण सिंह की शादी अमरपुर में कर दी थी। नारायण सिंह के कोई साला नहीं था। इस लिए उसका बेटा रामदास अपने ननिहाल अमरपुर में आकर बस गया। रामदास की शादी होने के बाद आकस्मिक मौत हो गई। उस समय उसकी पत्नी बेदकोर गर्भवती थी। समस्या गंभीर हो गई। बेदकोर को देखने वाला अब परिवार में कोई नहीं रहा। बेदकोर लुहाच परिवार की बहु थी। इसी समय दिलावर सिंह की पत्नी की भी मौत हो चुकी थी। इसलिए रघुबीर सिंह और दिलावर सिंह ने योजना बनाई कि बेदकोर को दिलावर सिंह के पल्ला लगा दी जाए। इससे दिलावर का भी वंश चल पड़ेगा और बेदकोर को भी सहारा मिल जाएगा।
05संतान और भूमि बँटवारा
जब बेदकोर दिलावर की पत्नी बन गई तो उसकी कोख से रामदास के नाम का एक लड़का पैदा हुआ जिसका नाम विजयपाल रखा गया। विजयपाल के नाम रघुबीर सिंह और दिलावर सिंह ने अपने अपने हिस्से की जमीन से 30-30 बीघा जमीन भी नाम कर दी। अब रघुबीर और दिलावर के पास 120-120 बीघा जमीन रह गई। बेदकोर कि कोख से दिलावर के नाम से दो लड़के हरपाल और ओमपाल पैदा हुए। इस प्रकार अमरपुर में नली हुसैनपुर और गढ़ी गुलडहर से आए दो परिवारों की संतान हैं।
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