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भडंग़पुर

हापुड़ · उत्तर प्रदेश

हापुड़ जिले की गोद में बसा भड़ंगपुर अपने बीते कल की दिलचस्प दास्तान समेटे है। गाँव के दस्तावेज लुहाच खानदान की विरासत, उनकी पीढ़ियों के सफर और बिरादरी के उन प्रमुख चेहरों की कामयाबियों को सामने लाते हैं जिन्होंने समाज में अपनी पहचान बनाई।

229 अनुच्छेद0 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
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भड़ंगपुर गाँव में लुहाच, तेवतिया और राणा गौत्र के लोग निवास करते हैं।

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गाँव के कई व्यक्तियों ने सैन्य सेवा, चिकित्सा और खेल प्रशिक्षण में योगदान दिया।

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गाँव की स्थिति और भूगोल

भड़ंगपुर हापुड़ जिले का एक मध्यम आबादी वाला गाँव है जो समतल और उपजाऊ भूमि पर बसा है। यहाँ की मुख्य फसलों में गन्ना, गेहूँ और अन्य अनाज शामिल हैं तथा पीने के पानी व स्कूल की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

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प्रमुख वंशज और वंशावली

गाँव की वंशावली में विभिन्न पीढ़ियों के उल्लेखनीय व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। इनमें बलवन्त सिंह, उमराव सिंह, डॉ. योगेन्द्र सिंह और डॉ. जय पाल सिंह प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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सैन्य सेवा: बलवन्त सिंह और उमराव सिंह

बलवन्त सिंह 14 मुर्रे जाट लांसर्स में घुड़सवार बने और उन्हें 1866 में बहादुरी के लिए पदक मिला। उनके वंशज उमराव सिंह ने ब्रिटिश-अफ़गान युद्ध में सेवा दी और उन्हें वर्दी मेजर की पदवी मिली।

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परंपरा और स्थानीय मान्यताएँ

वदाम सिंह की असामयिक मृत्यु के बाद कनक सिंह और बाद में शीश राम व तेजपाल सिंह से जुड़ी धार्मिक मान्यताएँ प्रचलित हुईं। गाँव में वदाम सिंह को बड़ा देवता और मन्टूर सिंह को छोटा देवता के रूप में याद किया जाता है।

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डॉक्टर योगेन्द्र सिंह लुहाच

दादा की देखरेख में पले योगेन्द्र सिंह ने 1924 में आगरा मेडिकल कॉलेज से स्नातक की उपाधि ली। उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में विभिन्न सैन्य ठिकानों पर चिकित्सक के रूप में कार्य किया।

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डॉक्टर जय पाल सिंह लुहाच

डॉ. जय पाल सिंह ने सर्जरी में उच्च शिक्षा प्राप्त कर चार दशकों तक चिकित्सा क्षेत्र में सेवा दी। वे प्रमुख अस्पतालों में वरिष्ठ पदों पर रहे और उन्हें पद्मश्री पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

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शीशपाल सिंह लुहाच

शीशपाल सिंह सेना में सेवा देने के बाद खेल जगत से जुड़े और एनआईएस पटियाला से कोचिंग डिप्लोमा लिया। उन्होंने कई संस्थानों और राज्यों में एथलेटिक्स कोच के रूप में कार्य किया।

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