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ज्ञानपुर

मुरादाबाद · उत्तर प्रदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बसा ज्ञानपुर मुख्य रूप से लुहाच गोत्र का गाँव है। लोक स्मृतियों और सामुदायिक परंपरा के मुताबिक, इस बस्ती की नींव कभी जोहरी ने रखी थी, जिसके बाद यह गाँव धीरे-धीरे फलता-फूलता चला गया।

24 अनुच्छेद0 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
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ज्ञानपुर की लगभग 90% आबादी लुहाच गोत्र से जुड़ी है और यहाँ की मुख्य फसल गन्ना है।

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परंपरा के अनुसार, नाँधा से चले जोहरी ने इस क्षेत्र में आकर गाँव की नींव रखी थी।

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कालान्तर में ज्ञानपुर से छज्जा नंगला और दरियापुर सहित कई अन्य गाँवों में विस्थापन हुआ।

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गाँव का परिचय और भूगोल

ज्ञानपुर मुरादाबाद जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर स्थित एक मध्यम आबादी वाला गाँव है। यहाँ की लगभग 90% आबादी लुहाच गोत्र की है और गाँव पक्की सड़कों से आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा है।

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भूमि और बुनियादी ढाँचा

गाँव का कुल रकबा लगभग 6000 बीघा है, जिसमें से अधिकांश भूमि लुहाच समुदाय के पास है और मुख्य पेशा खेती है। गाँव में स्कूल, मंदिर, पंचायत घर और आँगनबाड़ी केंद्र की सुविधा उपलब्ध है।

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प्रवासन की शुरुआत

परंपरा के अनुसार, जोहरी नाँधा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर निकले पहले समूह में शामिल थे। वे दुलारो राम के तीन पुत्रों में से एक थे।

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कुचेसर और नंगला उग्रसैन

तीनों भाई कुचेसर के पास पहुंचे और राजा से खेती व रहने के लिए जमीन मांगी। उग्रसैन वहीं एक नंगले में बस गए, जिसे बाद में नंगला उग्रसैन के नाम से जाना गया।

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ज्ञानपुर की स्थापना

होराम का परिवार भंड़ोली में रुका, जबकि जोहरी और बीरम सिंह आगे बढ़कर ज्ञानपुर पहुंचे। जोहरी ने यहाँ बसकर गाँव की नींव रखी, इसलिए इसे लुहाच का खेड़ा भी कहा जाता है।

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एक अन्य वृत्तांत

एक अन्य विवरण के अनुसार, जोहरी के बेटों ने पाँच गाँवों की पेशकश अस्वीकार कर मुरादाबाद के पास एक बड़ी झील किनारे डेरा डाला। बाद में यही बस्ती ज्ञानपुर गाँव के रूप में विकसित हुई।

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विस्थापन और वर्तमान पीढ़ी

ज्ञानपुर से आगे चलकर छज्जा नंगला, मुंडा खेड़ी और दरियापुर जैसे कई गाँवों में विस्थापन हुआ। वर्तमान में ज्ञानपुर में लुहाच परिवार की 40वीं पीढ़ी का उल्लेख मिलता है।

हर परिवार की कहानी मायने रखती है।

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