छज्जा नगला
मुरादाबाद · उत्तर प्रदेश
मुरादाबाद जिले की कांठ तहसील में स्थित छज्जा नंगला एक शांत देहाती गाँव है। पुराने अभिलेखों के पन्ने बताते हैं कि ज्ञानपुर से आए लुहाच परिवार ने यहाँ कदम रखा था, जिसके बाद उनकी संतानों ने इस बस्ती को आगे बढ़ाया और बसाया।
गाँव का रकबा लगभग 2300 बीघा और आबादी करीब 2000 है, जहाँ खेती मुख्य पेशा है।
ज्ञानपुर के जोरा सिंह 1875 में अपने चार बेटों के साथ छज्जा नंगला में आकर बस गए थे।
बाद की पीढ़ियों में परिवार के अन्य सदस्य भी यहाँ बसे और कुछ अन्य गाँवों में चले गए।
गाँव का परिचय और भूगोल
छज्जा नंगला मुरादाबाद की कांठ तहसील का एक गाँव है, जो पक्की सड़कों और पड़ोसी गाँवों से जुड़ा हुआ है। यहाँ लगभग 2000 की आबादी रहती है, उपजाऊ जमीन पर खेती होती है और विभिन्न गौत्रों के लोग निवास करते हैं।
जोरा सिंह का आगमन
पारंपरिक विवरण के अनुसार, ज्ञानपुर के जोरा सिंह का विवाह छज्जा नंगला में हुआ था और पत्नी को मायके की जमीन मिलने पर वे 1875 में अपने चार बेटों के साथ यहाँ आकर बस गए। बड़े बेटे गंगा राम ज्ञानपुर में ही रहे।
परिवार का विस्तार और आगे का प्रवास
गंगा राम के पुत्र महाराज सिंह 1975 में छज्जा नंगला आकर बसे और परिवार ने मेहनत से जमीन खरीदी। आगे चलकर 37वीं पीढ़ी के खचेड़ू घरोंट गाँव चले गए, जबकि ज्ञानपुर में लुहाच परिवार की 40वीं पीढ़ी चल रही है।
01गाँव का परिचय और भूगोल
छज्जा नंगला गाँव का इतिहास
छज्जा नंगला गाँव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की कांठ तहसील का एक मध्यम आबादी का गाँव है। यह जिला मुख्यालय से 25 किलो मीटर और तहसील मुख्यालय से 10 किलो मीटर दूर स्थित है। इसके पूर्व में ढाकी, मुंडा खेड़ी, दक्षिण में सदुपुरा,शेखपुरा, उत्तर में अकबरपुर और सिहादी गाँव की सीमा लगती है। इसका सभी सीमावर्ती गाँवों से पक्की सड़क से संपर्क है। इस गाँव की कुल आबादी लगभग 2000 लोगों की है जिसमें से लुहाच परिवार के 175 लोग रहते हैं। लोगों का मुख्य पेश खेती बाड़ी है। जमीन समतल व उपजाऊ है। इस गाँव का कुल रकबा 2300 बीघा है जिसमें से लुहाच परिवार के पास 450 बीघा जमीन है। सिंचाई ट्यूबवैल से होती है। इस गाँव में 4 तालाब और एक बहुत बड़ी झील है। लुहाच के अलावा इस गाँव में देओल, ढीलों, गंधर्व और फ़ौगाट गौत्र का लोग भी रहते हैं।
02जोरा सिंह का आगमन
ज्ञानपुर गाँव की पीढ़ी संख्या 34 के मुताबिक जोरा सिंह के 5 बेटे थे। इनके नाम गंगा राम, रतिराम, काशी राम, नानक और मुख्तियार सिंह थे। जोरा सिंह की शादी लगभग 150 साल पहले मुरादाबाद जिले के छज्जा नंगला गाँव में हुई थी। उसकी पत्नी के कोई भाई नहीं था। ससुर के पास जमीन काफी थी। इस लिए उसकी पत्नी अपने पिता की जायदादकी मालिकाना हकदार बन गई। ज्ञानपुर में भी जोरा सिंह के पास काफी जमीन थी। इस लिए जोरा सिंह नेअपने बड़े बेटे गंगा राम को ज्ञानपुर में ही बसा दिया और बाकी चारों बेटों के साथ 1875 ईस्वी में छज्जा नंगला में अपनी ससुराल में आकर बस गया।
03परिवार का विस्तार और आगे का प्रवास
बाद में जोरा सिंह का पौता और बड़े बेटे गंगा राम का बेटा महाराज सिंह भी 1975 ईस्वी में छज्जा नंगला में आकर बस गया। यहाँ आकर लुहाच परिवार ने खूब मेहनत की और काफी जमीन भी खरीद ली। इस समय इस गाँव में लुहाच परिवार के पास 450 बीघा जमीन है।
बाद में37 वीं पीढ़ी से मुख्तियार सिंह का बेटा खचेड़ू घरोंट गाँव में जाकर बस गया। ज्ञानपुर में इस समय लुहाच परिवार की 40 वीं पीढ़ी चल रही है।
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