भींवपुरा
नागौर · राजस्थान
राजस्थान के नागौर जिले की नावाँ तहसील में बसा भींवपुरा पूर्व सरपंच भींवा राम के नाम से जाना जाता है। सामुदायिक विवरण बताते हैं कि लगभग 1800 ईस्वी में हरियाणा के मारोत से आकर लुहाच वंश के लोग यहाँ बसे थे।
गाँव का नाम 1992 से पहले ठिकरिया खुर्द की ढाणी था, जिसे बाद में तीन बार सरपंच रहे शिक्षक भींवा राम के नाम पर भींवपुरा किया गया।
यहाँ शहीद बंसी लाल की स्मृति में एक माध्यमिक विद्यालय और स्मारक स्थित है, जो 2006 में असम में शहीद हुए थे।
अभिलेखीय वंशावली के अनुसार, पाँचू राम लुहाच लगभग 1800 ईस्वी में यहाँ आए थे और वर्तमान में उनकी 11वीं पीढ़ी निवास कर रही है।
भींवपुरा का परिचय और भूगोल
यह नागौर, जयपुर और सीकर जिलों की सीमा पर स्थित लगभग 2000 की आबादी वाला गाँव है। यहाँ शहीद बंसी लाल माध्यमिक स्कूल, एक शहीदी स्मारक, तीन मंदिर और अन्य जनसुविधाएं मौजूद हैं।
गाँव का नामकरण और भींवा राम
1992 से पूर्व यह मिंडा पंचायत के तहत ठिकरिया खुर्द की ढाणी के नाम से जाना जाता था। पूर्व शिक्षक और तीन बार सरपंच रहे भींवा राम के सामाजिक व राजनीतिक प्रयासों से इसे स्वतंत्र गाँव का दर्जा मिला और उन्हीं के नाम पर इसका नामकरण हुआ।
लुहाच वंश का आगमन और विस्तार
अभिलेख के अनुसार, हरियाणा के मारोत गाँव से पाँचू राम लुहाच लगभग 1800 ईस्वी में सपरिवार यहाँ आकर बसे थे। उनके पुत्र रूपा राम के वंशज वर्तमान में 11वीं पीढ़ी में हैं, जिनमें से कई परिवार आसपास के अन्य गाँवों में भी बसे।
01भींवपुरा का परिचय और भूगोल
भींवपुरा गाँव का इतिहास
भींवपुरा गाँव राजस्थान के नागौर जिले की नावाँ तहसील का एक मध्यम आबादी वाला गाँव है। यह जिला मुख्यालय से 180 किलोमीटर और तहसील मुख्यालय से 43 किलोमीटर दूर स्थित है। यहराजस्थान के तीन जिलों नागौर, जयपुर और सीकर की सीमा के तिराहा पर स्थित है। इसके पूर्व में सलहदीपुरा, रामजीपुरा, उत्तर में किशनगढ़ रेनवाल, दक्षिण में मांडा भीम सिंह और पश्चिम में मिंडा गाँव की सीमा लगती है। सलहदीपुरा, रामजीपुरा और मिंडा गाँव पक्की सड़क से और किशनगढ़ रेनवाल और मांडा भीम सिंह गाँव कच्चे रास्ते से जुड़े हैं। इस गाँव की कुल आबादी लगभग 2000 लोगों की है जबकी लुहाच गौत्र के लगभग 150 लोग रहते हैं। इसमें लुहाच गौत्र के अलावा नेटवाल, बीजारनिया, जांघू, फुलफकर, औंला और ऊड़ी गौत्र के लोग रहते हैं। इस गाँव में एक माध्यमिक स्कूल है जिसका नाम शहीद बंसी लाल माध्यमिक स्कूल है। बंसी लाल भींवा राम लुहाच के दूसरे नम्बर के बेटे थे। वह केन्द्रीय सुरक्षा बल पुलिस की 7 वीं बटालियन में सिपाही के पद पर सेवारत थे। बंसी लाल 2006 ईस्वी में असम के तिनसुकिया में उग्रवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। गाँव में उनकी स्मृति में शहीदी स्मारक बना हुआ है। इस गाँव में इसके अतिरिक्त 3 मंदिर, 1 चौपाल, 2 जोहड़ और 2 आंगनवाड़ी केंद्र भी हैं।
02गाँव का नामकरण और भींवा राम
सन 1992 से पहले इस गाँव का नाम भींवपुरा नहीं था। इसको ठिकरिया खुर्द की ढाणी के नाम से जाना जाता थाजो कि मिंडा ग्राम पंचायत के तहत पड़ती थी। उस समय तक मिंडा ग्राम पंचायत के तहत छः गाँव आते थे। ठाकरिया खुर्द की ढाणी में भीवा राम नाम का एक अध्यापक होता था। उसका नाम समाज और प्रशासन दोनों में चर्चित था क्योंकि वह बहुत ईमानदार औरशिक्षित होने के साथ साथ लगनशील इन्सान भी थे। वह मिंडा ग्राम पंचायत के लगातार तीन बार सरपंच भी रहे थे। उसने न केवल अपनी ढाणी के लिए बल्कि उसकी जिम्मेदारी के तहत जितने भी गाँव थे उन सबके उत्थान के लिए प्रशासन से मिलकर बहुत काम कराए थे। बादमेंअपने अध्यापक के व्यवसाय से त्यागपत्र देकर राजनीति में उतर गए। अपने सामाजिक व राजनीतिक काम के कारण उसने अपनी ढाणी को एक स्वतंत्र गाँव का दर्जा दिलाने में सफलता हासिल की। इस प्रकार ठिकरिया की ढाणी का नाम बदलकर सरकार ने उसी के नाम से भींवपुरा रख दिया। इस लिए इस गाँव के जनक भींवा राम जी को माना जाता है।
03लुहाच वंश का आगमन और विस्तार
इस गाँव के प्रथम लुहाच पुरुष पांचों राम लुहाच हरियाणा के झज्जर जिले के मारोत गाँव से चलकर लोहागढ़, बाजियावास और लाडनू होते हुए लगभग 1800 ईस्वी में सपरिवार ठिकरिया की ढाणी पहुचे थे। मारोत गाँव की वंशावली के अनुसार पीढ़ी संख्या 29 में जन्मे नारायण सिंह लुहाच के तीन बेटे थे। इनके नाम जयमल, भूरा राम और पाँचू राम थे।
जयमल और भूरा राम मारोत में ही रह गए जबकि पाँचू राम सपरिवार राजस्थान के लोहागढ़, बाजियावास, लाडनू होते हुए ठिकरिया की ढाणी जो कि नागौर जिले के मिंडा गाँव का हिस्सा था में आकर रहने लगे। पाँचू राम के चार बेटे थे जिसमे से सिर्फ रूपा राम ही शादी शुदा था। उसी के वंशज आज इस गाँव में रहते हैं। पाँचू राम से अब तक इस गाँव में लुहाच गौत्र की 11 वीं पीढ़ी चल रही है।आगे चलकर इस गाँव से आसपास के पाँच अन्य गाँव में लुहाच परिवार के लोगों का विस्थापन हुआ। ये गाँव हैं सीकर जिले के धींगपुर की सूरत राम की ढाणी, खाटू श्याम और सारगोंठ और जयपुर जिले का किशानगढ़ रेनवाल और पुनाना।
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