हमारी साझा धरोहर

हमारे गाँव

हर गाँव का अपना रंग। अपनी मिट्टी की कहानी खोजिए।

हमारी जड़ों से एक कहानी

भींवपुरा

नागौर · राजस्थान

राजस्थान के नागौर जिले की नावाँ तहसील में बसा भींवपुरा पूर्व सरपंच भींवा राम के नाम से जाना जाता है। सामुदायिक विवरण बताते हैं कि लगभग 1800 ईस्वी में हरियाणा के मारोत से आकर लुहाच वंश के लोग यहाँ बसे थे।

5 अनुच्छेद5 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
भींवपुरा — स्मारक स्थल

स्मारक स्थल · हमारे संग्रह से 1 / 2

01

गाँव का नाम से पहले ठिकरिया खुर्द की ढाणी था, जिसे बाद में तीन बार सरपंच रहे शिक्षक भींवा राम के नाम पर भींवपुरा किया गया।

02

यहाँ शहीद बंसी लाल की स्मृति में एक माध्यमिक विद्यालय और स्मारक स्थित है, जो में असम में शहीद हुए थे।

03

अभिलेखीय वंशावली के अनुसार, पाँचू राम लुहाच लगभग ईस्वी में यहाँ आए थे और वर्तमान में उनकी 11वीं पीढ़ी निवास कर रही है।

01

भींवपुरा का परिचय और भूगोल

यह नागौर, जयपुर और सीकर जिलों की सीमा पर स्थित लगभग 2000 की आबादी वाला गाँव है। यहाँ शहीद बंसी लाल माध्यमिक स्कूल, एक शहीदी स्मारक, तीन मंदिर और अन्य जनसुविधाएं मौजूद हैं।

02

गाँव का नामकरण और भींवा राम

1992 से पूर्व यह मिंडा पंचायत के तहत ठिकरिया खुर्द की ढाणी के नाम से जाना जाता था। पूर्व शिक्षक और तीन बार सरपंच रहे भींवा राम के सामाजिक व राजनीतिक प्रयासों से इसे स्वतंत्र गाँव का दर्जा मिला और उन्हीं के नाम पर इसका नामकरण हुआ।

03

लुहाच वंश का आगमन और विस्तार

अभिलेख के अनुसार, हरियाणा के मारोत गाँव से पाँचू राम लुहाच लगभग 1800 ईस्वी में सपरिवार यहाँ आकर बसे थे। उनके पुत्र रूपा राम के वंशज वर्तमान में 11वीं पीढ़ी में हैं, जिनमें से कई परिवार आसपास के अन्य गाँवों में भी बसे।

हर परिवार की कहानी मायने रखती है।

अपने गाँव की जानकारी, परिवार का छूटा हुआ रिश्ता या किसी प्रियजन की स्मृति साझा करें।

सदस्य बनें / लॉगिन करेंवंशावली खोलें