किशनगढ़ रेनवाल
जयपुर · राजस्थान
किशनगढ़ रेनवाल राजस्थान के जयपुर जिले का एक जाना-माना कस्बा और तहसील है। यहाँ के ऐतिहासिक पन्नों में कस्बे का भौगोलिक विस्तार, स्थानीय जनजीवन, सार्वजनिक सुविधाएँ और यहाँ आकर बसे लुहाच गौत्र के परिवार दर्ज हैं।
कस्बा लगभग 340 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसकी आबादी करीब दो लाख है।
अभिलेख के अनुसार, लुहाच गौत्र का पहला परिवार लगभग 1900 ईस्वी में भींवपुरा गाँव से यहाँ आकर बसा था।
इतिहास का संदर्भ
यह खंड किशनगढ़ रेनवाल गाँव के इतिहास का परिचय प्रस्तुत करता है।
भौगोलिक स्थिति एवं सुविधाएँ
किशनगढ़ रेनवाल जयपुर जिले का एक बड़ा कस्बा और तहसील मुख्यालय है जो सीकर और नागौर की सीमाओं के पास स्थित है। यहाँ अनेक विद्यालय, अस्पताल, धार्मिक स्थल और नलकूप आधारित सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली मौजूद है।
लुहाच गौत्र का आगमन
गाँव की वंशावली के अनुसार, लुहाच गौत्र के पदमा राम लगभग 1900 ईस्वी में नागौर जिले के भींवपुरा से सपरिवार यहाँ आकर बसे थे। वर्तमान में इस कस्बे में इस परिवार की चौथी पीढ़ी निवास कर रही है।
01इतिहास का संदर्भ
किशनगढ़ रेनवाल गाँव का इतिहास
02भौगोलिक स्थिति एवं सुविधाएँ
किशनगढ़ रेनवाल राजस्थान के जयपुर जिले की एक तहसील है। यह लगभग दो लाख आबादी वाला बहुत बड़ा कस्बा व तहसील मुख्यालय है जो कि जिला मुख्यालय से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके उत्तर पश्चिम में सीकर और दक्षिण में नागौर जिले की सीमा लगती है। इस शहर के पूर्व में मूँडियागढ़, डूंगरी, बांसडी, रलावता, उत्तर पूर्व में बधाल, उत्तर में पचार, उत्तर पश्चिम में श्यामपुरा, पश्चिम में कुली, खत्रियावास, दक्षिण पश्चिम में कल्याणपुरा, मूण्डली, बालियावास, दक्षिण में प्रताप पुरा और मिंडी गाँव की सीमा लगती है। तहसील मुख्यालय व मुख्य कस्बा होने के कारण इन सब सीमावर्ती गाँवों से पक्की सड़क से संपर्क है। इस कस्बे का कुल क्षेत्रफल लगभग 340 वर्ग किलोमीटर है। कस्बे की कुल आबादी लगभग दो लाख लोगों की है जिसमें से लुहाच गौत्र के लगभग 25 लोग रहते हैं। लुहाच गौत्र के लोगों के पास 20 एकड़ जमीन है। इस कस्बे में 85 स्कूल हैं जिसमें से 55 सरकारी और 30 गैर सरकारी हैं। इसके अलावा 1 सरकारी अस्पताल, 20 गैर सरकारी अस्पताल, 1 पशु अस्पताल, 15 अंगनबाड़ी केंद्र,50 मंदिर व 5 मस्जिद है। हिन्दू मत के मानने वालों के अतिरिक्त मुसलमान मत का अनुसरण करने वाली आबादी भी है। कस्बे का सम्पूर्ण रकबा समतल है लेकिन नहर के अभाव में बरानी है। जमीनी पानी मीठा होने के कारण ट्यूबवेल से माइक्रो इरीगेसन प्रणाली के तहत पूरे इलाके की सिचाई होती है। आबादी और पशुओं के लिए शहर में जगह जगह जल घर बने हुए हैं जहां से पानी की आपूर्ति होती है।
03लुहाच गौत्र का आगमन
इस कस्बे में लुहाच गौत्र का पहला परिवार नागौर जिले के भींवपुरा गाँव जो कि 1992 ईस्वी से पहले मिंडा गाँव की ठिकरिया की ढाणी नाम से जाना जाता था से लगभग 1900 ईस्वी में आया था। भींवपुरा गाँव की वंशावली के अनुसार पीढ़ी संख्या 37 के हेमा राम का एक बेटा पदमा राम हुआ। पदमा राम लगभग 1900 ईस्वी में सपरिवार किशनगढ़ आकर बस गया तब से अब तक इस कस्बे में लुहाच परिवार की 4 वीं पीढ़ी चल रही है।
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