सारगोथ
सीकर · राजस्थान
राजस्थान के सीकर जिले की खंडेला तहसील में स्थित सारगोथ एक घनी आबादी वाला बड़ा गाँव है। यहाँ कई गोत्रों के लोग साथ रहते हैं, और क्षेत्रीय स्मृति के अनुसार लुहाच परिवार का सिलसिला 1850 ईस्वी से जुड़ा हुआ है।
गाँव का रकबा लगभग 52,000 पक्का बीघा और जनसंख्या करीब 12,000 है, जहाँ सिंचाई फव्वारा प्रणाली से होती है।
अभिलेख के अनुसार, पहले लुहाच व्यक्ति गोलू राम 1850 ईस्वी में नागौर जिले की ठाकरिया की ढाणी (भींवपुरा) से यहाँ आए थे।
गाँव का परिचय और अवस्थिति
सारगोथ गाँव राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है और इसका रकबा करीब 52,000 पक्का बीघा है। यहाँ लगभग 12,000 लोग रहते हैं तथा कई सामाजिक व बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं।
लुहाच परिवार का आगमन
अभिलेख के अनुसार, 1850 ईस्वी में गोलू राम लुहाच अपने परिवार के साथ नागौर जिले से आकर सारगोथ में बसे थे। बाद में उनके पोते राधू राम 1950 ईस्वी में खाटू श्याम जाकर बस गए।
01गाँव का परिचय और अवस्थिति
सारगोथ गाँव का इतिहास
सारगोथ गाँव राजस्थान के सीकर जिले की खडेला तहसील का एक घनी आबादी का गाँव है जो कि जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर और तहसील मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके पूर्व में सींगोथ, इटावा, उत्तर में सीमाला, दक्षिण में ढ़ोडसर और पश्चिम में रींगस कस्बा की सीमा लगती है। रींगस इस गाँव का नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यह गाँव जयपुर-सीकर मार्ग पर सीकर से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। इस गाँव की आबादी लगभग 12000 लोगों की है जिसमें से लुहाच गौत्र के लगभग 55 लोग रहते हैं। इस गाँव में लुहाच के आलावा बागड़िया, बाजिया, कुड़ी, हरितवाल, महरिया, कलवानिया, बलोदा और बेनीवाल गौत्र के लोग भी रहते हैं। इस गाँव की सीमा बहुत बड़ी है जिसका रकबा लगभग 52000 पक्का बीघा है जिसमें लुहाच परिवार के पास 70 बीघा जमीन है। सारी जमीन बरानी है जिसकी सिचाई बोरिंग वेल से माइक्रो इरिगेसन तकनीक की फवारा प्रणाली से सिचाई होती है। इस गाँव में 10 मंदिर, 2 तालाब, 1 स्कूल, 1 हस्पताल, 1 पशु हस्पताल, 1 चौपाल और 10 आंगनबाड़ी केंद्र हैं।
02लुहाच परिवार का आगमन
इस गाँव के प्रथम लुहाच पुरुष गोलू राम नागौर जिले की ठाकरिया की ढाणी से 1850 ईस्वी में सपरिवार आए थे। ठाकरिया की ढाणी जिसका नया नाम भींवपुरा है कि वंशावली के मुताबिक 33 वीं पीढ़ी में दीपा राम लुहाच पैदा हुए । उसका एक ही बेटा था जिसका नाम गोलू राम था। गोलू राम सपरिवार सारगोथ गाँव में आकर बस गए थे। बाद में गोलू राम का पोता राधू राम 1950 ईस्वी में खाटू श्याम में आकर बस गया था।
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