कबूलपुर
रोहतक · हरियाणा
रोहतक जिले का कबूलपुर एक बड़ा गाँव है, जो अपनी सीमाओं, बुनियादी सुविधाओं और बसावट के सफर को सहेजे हुए है। स्थानीय अभिलेख बताते हैं कि यहाँ लुहाच गोत्र के साथ-साथ अन्य बिरादरियों का ताना-बाना कैसे विकसित हुआ।
कबूलपुर गाँव में दो पाना—दरकान पाना और भगत पाना—हैं और इसकी सिंचाई मुख्य रूप से नहरी तंत्र से होती है।
गाँव में लगभग 5000 की आबादी है और यहाँ स्कूल, अस्पताल, चौपाल और मंदिर जैसी कई सार्वजनिक सुविधाएँ मौजूद हैं।
नीमली गाँव की वंशावली के अनुसार, लुहाच गौत्र के सरभू राम लगभग 1875 ईस्वी में कबूलपुर आकर बसे थे।
गाँव का परिचय और बुनियादी ढाँचा
कबूलपुर रोहतक जिले का एक बड़ा गाँव है जो पक्की सड़कों और नहरों से जुड़ा हुआ है। यहाँ लगभग 5000 लोग रहते हैं और गाँव में स्कूल, अस्पताल, चौपालें तथा कई गौत्रों के परिवार मौजूद हैं।
लुहाच गौत्र के बसने का इतिहास
नीमली गाँव के रिकॉर्ड के अनुसार, सरभू राम का विवाह कबूलपुर में डागर गौत्र की श्यामा कुमारी से हुआ था। पारिवारिक कारणों से उनके ससुर ने उन्हें जमीन देकर कबूलपुर में बसाया, जहाँ से लुहाच गौत्र की पीढ़ी आगे बढ़ी।
01गाँव का परिचय और बुनियादी ढाँचा
कबूलपुर गाँव का इतिहास
कबूलपुर गाँव हरियाणा के रोहतक जिले का एक बड़ा गाँव है। यह जिला मुख्यालय से रोहतक-बेरी मार्ग पर महज 15 किलो मीटर दूर स्थित है। इसके पूर्व में गोछी, पश्चिम में मसूदपुर और सूडाणा, उतर में रिटोली और दक्षिण में बेरी गाँव की सीमा लगती है। सभी सीमावर्ती गाँव से पक्की सड़क मार्ग से संपर्क है। गाँव की सीमा बहुत बड़ी है। इसका रकबा 20000 बीघा है जबकि लुहाच गौत्र के लोगों के पास 120 बीघा जमीन है। गाँव में दो पाना हैं जिनको दरकान पाना और भगत पाना के नाम से जाना जाता है। दरकान पाना के पास 900 बीघा और भगत पाना के पास 1100 बीघा जमीन है। सारा रकबा नहरी है जिसकी सिचाई जवाहर लाल नेहरू नहर और उससे निकला बसाण-भूतान रजबाहा से होती है। गाँव की कुल आबादी लगभग 5000 लोगों की है जिसमें से 10 परिवार लुहाच गौत्र के लोगों के हैं। गाँव में लगभग 3500 वोट हैं। 2021-26 की योजना के तहत अमर सिंह लुहाच इस गाँव का सरपंच चुना गया। गाँव में लुहाच के अलावा डागर, नहरा, धनखड़ और कालीरमण गौत्र के लोग भी रहते है। गाँव में एक 10 वीं कक्षा तक लड़कों का और एक लड़कियों का स्कूल है। इसके अतिरिक्त एक हस्पताल, एक पशु हस्पताल, पाँच आंगनबाड़ी, पाँच चौपाल, पाँच मंदिर और दो जोहड़ हैं।
02लुहाच गौत्र के बसने का इतिहास
नीमली गाँव की वंशावली के मुताबिक थानाण पाना में 32 वीं पीढ़ी के दानी राम लुहाच के छः बेटे थे। उनमें से तीसरे नम्बर के बेटे बाल्को राम के दो बेटे हुए थे। छोटे बेटे सरभू राम की शादी रोहतक जिले के कबूलपुर गाँव में डागर गौत्र की श्यामा कुमारी से हुई थी। सरभू राम व श्यामा देवी से नीमली में रहते दो बेटे पैदा हुए थे। बड़े बेटे का नाम नन्द राम और छोटे बेटे का नाम बलकारा था। श्यामा देवी के परिवार में लोगों की कमी महसूस होती थी। आए दिन पड़ोसी श्यामा देवी के परिवार वालों को डराते धमकाते रहते थे। इस कारण से उसके पिता ने अपने दामाद को सपरिवार कबूलपुर में बुलाकर 120 बीघा जमीन देकर बसा लिया। इस प्रकार कबूलपुर के लुहाच गौत्र के प्रथम पुरुष सरभू राम लगभग 1875 ईस्वी में नीमली गाँव से आए थे और तब से अब तक इस गौत्र की 8 वीं पीढ़ी चल रही है।
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