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गुगाहेड़ी

रोहतक · हरियाणा

शुरुआती बसावट, विभाजन के बदलाव और नए परिवारों का आगमन—गुगाहेड़ी की कहानी के कई पड़ाव हैं। रोहतक की महम तहसील में स्थित इस गाँव के अभिलेखों में इनका सफ़र पढ़िए।

84 अनुच्छेद26 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
गुगाहेड़ी — सामूहिक आयोजन

सामूहिक आयोजन · हमारे संग्रह से 1 / 3

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विभाजन से पहले गाँव की कृषि भूमि पर कर अदा करने के बाद सेठ महताब सिंह को इसका मालिकाना हक मिला था।

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के बाद स्वतंत्रता सेनानियों और शरणार्थियों को यहाँ जमीन व मकान आबंटित किए गए।

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से गिरावड़ के लुहाच परिवार और अन्य गाँवों के किसान जमीन खरीदकर यहाँ आकर बसने लगे।

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गाँव की स्थिति और प्रारंभिक इतिहास

गुगाहेड़ी रोहतक जिले की महम तहसील का गाँव है जो आसपास के गाँवों और एक्सप्रेसवे से जुड़ा है। पुराने समय में अकाल और कर न चुका पाने के कारण सेठ महताब सिंह ने कर भरकर यहाँ की जमीन प्राप्त की थी।

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बंटवारा और नए परिवारों का पुनर्वास

1947 में विभाजन के बाद मुस्लिम परिवारों के पलायन के उपरांत स्वतंत्रता सेनानियों और पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को जमीन दी गई। सेठ के परिवार ने बाद में अपनी हवेलियाँ व जमीनें बेचना शुरू किया, जिससे बाहर से अन्य किसान आकर बसे।

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सूबेदार चुन्नी लाल और लुहाच परिवार का आगमन

गिरावड़ निवासी गोधा राम के पुत्र पूर्व सूबेदार चुन्नी लाल ने सेठ से 22 एकड़ जमीन खरीद ली। वर्ष 1956 में परिवार का पहला हिस्सा गुगाहेड़ी आकर आबाद हुआ।

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अन्य परिवारों का विस्तार और वर्तमान स्थिति

रामानन्द के बेटों और गोधा राम के अन्य भाइयों ने भी जमीनें खरीदकर गाँव में निवास बनाया। आज लुहाच परिवार के पास बड़ी भूमि है और कटवाल से आए दूहन गोत्र के लोग बहुतायत में हैं।

हर परिवार की कहानी मायने रखती है।

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