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मारोत

झज्जर · हरियाणा

हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित मारोत गाँव की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक ताने-बाने और भूमि विस्तार की झलक यहाँ मिलती है। पारंपरिक विवरणों के आधार पर यह अभिलेख लुहाच समुदाय के ऐतिहासिक प्रवास और शुरुआती बसावट की कहानी भी संजोता है।

33 अनुच्छेद0 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
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मारोत गाँव में मुख्य रूप से लुहाच और बांगड़ गौत्र के लोग रहते हैं, और के दशक में बीड़ की जमीन खरीदने से इसका रकबा 18000 बीघा हो गया।

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पारंपरिक वंशावली के अनुसार, पैंतावास और नीमली होते हुए छू छू राम लुहाच मारोत आकर बसे थे।

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गाँव का परिचय और जनसांख्यिकी

मारोत झज्जर जिले की मातनहेल तहसील का गाँव है जिसकी आबादी लगभग 6000 है। यहाँ मुख्य रूप से लुहाच और बांगड़ सहित कई अन्य गौत्रों के लोग रहते हैं तथा बुनियादी जनसुविधाएँ उपलब्ध हैं।

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भूमि रकबा और बीड़ की जमीन का अधिग्रहण

प्रारंभ में गाँव के पास 9000 बीघा जमीन थी, जो 1970 के दशक में छुछकवास बीड़ की जमीन खरीदने के बाद 18000 बीघा हो गई। सरकारी योजना के तहत मिली जमीन पर उपजी समस्याओं के चलते यह जमीन अन्य किसानों के पास आ गई।

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कृषि और सिंचाई व्यवस्था

गाँव की भूमि असिंचित है और खेती ट्यूबवेल व वर्षा पर आधारित है। किसान सरकारी अनुमति से नंबर 8 ड्रेन से भूमिगत पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई करते हैं।

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पैंतावास में लुहाच पूर्वजों का इतिहास

नाँधा की वंशावली के अनुसार पहाड़ सिंह ने पैंतावास बसाया था जहाँ लुहाच परिवार लगभग 100 वर्ष रहे। जींद रियासत के समय कर अदायगी को लेकर जमीन सांगवान किसान के नाम दर्ज हो गई।

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नीमली प्रवास और रुलियावास

पैंतावास छोड़ने के बाद ओनाड़ा के बेटे और भानजा रुलिया राम नीमली आए। रुलिया राम आगे चलकर एक नई जगह बसे, जिसका नाम रुलियावास पड़ा।

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मारोत में बसावट और विस्थापन

छुछकवास में जमीन न मिलने पर छू छू राम मारोत आ गए और बांगड़ गौत्र की सहमति से बस गए। मारोत से बाद की पीढ़ियों में कुछ लोग भींवपुरा और रिटोली भी विस्थापित हुए।

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