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मारोत

रोहतक · हरियाणा

हरियाणा के झज्जर जिले का मारोत गाँव अपनी वंशावली परंपरा नाँधा और पैंतावास से जोड़ता है। क्षेत्रीय अभिलेख बताते हैं कि छू छू राम लुहाच के बसने और कृषि भूमि के विस्तार के साथ इस गाँव ने आकार लिया।

33 अनुच्छेद0 तस्वीरेंगाँव की वंशावली →
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मारोत में लगभग 6000 की आबादी है, जिसमें मुख्य रूप से लुहाच और बांगड़ गौत्र के लोग शामिल हैं।

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के दशक में छुछकवास बीड़ की भूमि जुड़ने से गाँव का कृषि क्षेत्र बढ़कर 18,000 बीघा हो गया।

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पारंपरिक वृत्तांत के अनुसार, पैंतावास और नीमली से होते हुए छू छू राम लुहाच मारोत आकर बसे।

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गाँव का परिचय और जनसांख्यिकी

मारोत झज्जर जिले की मातनहेल तहसील का गाँव है जिसकी आबादी लगभग 6000 है। यहाँ मुख्य रूप से लुहाच और बांगड़ गौत्र के अलावा अन्य समुदाय रहते हैं तथा बुनियादी जनसुविधाएँ उपलब्ध हैं।

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भूमि विस्तार और सिंचाई व्यवस्था

गाँव का रकबा छुछकवास बीड़ की जमीन मिलने के बाद 9000 से बढ़कर 18000 बीघा हो गया। यहाँ की खेती मुख्य रूप से बारिश, ट्यूबवेल और 8 नंबर ड्रेन से पाइपलाइन द्वारा होने वाली सिंचाई पर निर्भर है।

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नाँधा और पैंतावास का पैतृक इतिहास

पारंपरिक वंशावली के अनुसार नाँधा से पहाड़ सिंह लगभग 1500 ईस्वी में पैंतावास आकर बसे थे। बाद में जींद रियासत के समय भूमि कर के विवाद के चलते ओनाड़ा राम का परिवार पैंतावास छोड़ने पर विवश हुआ।

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अभिलेख में रिक्त अनुभाग

मूल अभिलेख के इस हिस्से में कोई पाठ्य सामग्री दर्ज नहीं है।

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मारोत में छू छू राम का आगमन

नीमली और छुछकवास के बाद छू छू राम लुहाच मारोत आए, जहाँ पहले से बसे बांगड़ गौत्र ने उन्हें शरण दी। तब से यहाँ 22 पीढ़ियाँ बीत चुकी हैं और कुछ परिवार अन्य स्थानों पर भी बसे।

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